ट्रैक्टर का साइलेंसर आगे की तरफ क्यो होता है ?
खेतों में चलता हुआ ट्रैक्टर तो सभी ने देखा ही होगा
लेकिन क्या आपको पता है की ट्रैक्टर का साइलंसर ऊपर आसमान कि तरफ क्यो होता है । आइए इसका टेक्निकल लॉजिक समझने की कोशिश करते हैं:-
क्यो लगाया जाता है ट्रैक्टर का साइलेंसर आगे की तरफ ?
जैसा की हम सब जानते है ट्रैक्टर कोई शाही सवारी नहीं है इसका उपयोग कृषि कार्यों के लिए किया जाता है
अतः बहुत आवश्यक है कि इसका लागत मूल्य कम से कम रखा जाए। ऐसे में जब इंजन अगले हिस्से में है तो गैर जरूरी पाइपिंग जोड़ते हुए साइलेंसर को घुमा-फिरा कर कारों की तरह पीछे तक ले जाने में अनावश्यक खर्च से बचाया गया है। साथ ही ये रखरखाव एवं मरम्मत की दृष्टि से भी उपयुक्त है।
क्यो नही होता है ट्रैक्टर का साइलेंसर पीछे की तरफ ?
ट्रैक्टर में अक्सर पीछे की तरफ ट्राली जोड़ी है ।जिसमें अनाज, फल, सब्जियों के अलावा कभी-कभी कुछ लोग भी सफर करते हैं। सोचिए अगर इंजन से निकलने वाली जहरीली गैसें पीछे की तरफ निकलतीं तो उन फल, सब्जियों एवं अनाज के दूषित होने के साथ ही बैठने वाले लोगों को भी सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता। कृषि संबंधी बहुत से कार्यों में भी पीछे की तरफ लगा हुआ साइलेंसर उपयुक्त नहीं है। जैसे कि खेत की जुताई, बुवाई एवं फसल की कटाई इत्यादि। साइलेंसर पीछे होता तो फसल कटते-कटते ही दूषित हो जाती।
ट्रैक्टर का साइलेंसर ट्रक की तरह साइड में क्यो नहीं होता है ?
ट्रैक्टर और ट्रक का डिजाइन एक दूसरे से बिल्कुल अलग होता है इसी वजह से ट्रैक्टर को ट्रक से कंपेयर नहीं किया जा सकता है । हालांकि ट्रक और ट्रैक्टर दोनों ही ताकतवर वाहन है और दोनों ही वजन उठाने के काम आते है , परंतु दोनों का डिजाइन अलग-अलग होता है। ट्रक में ड्राइवर का केबिन आगे, इंजन नीचे और साइलेंसर साइड में होता है। जबकि ट्रैक्टर में इंजन आगे, साइलेंसर आसमान की तरफ और ड्राइवर की कुर्सी साइलेंसर के नीचे कुछ इस तरह से होती है कि साइलेंसर से निकलने वाला काला धुआं ड्राइवर को पार करते हुए आसमान में घुल जाए। यदि उसे ट्रक की तरह साइड में लगा दिया तो ट्रैक्टर का ड्राइवर कुछ ही दिनों में अंधा हो जाएगा।

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